भाई बहन का प्रेम सूत्र
डा० जी० भक्त

रक्षाबंधन का सचित्र दृष्य
भाई बहन का प्रेम सुखद सम सुखद मातु पिता का प्यार।
दुग्ध पान का पोषण वैसा छात्र गुरु का साथ।।
जीवन में अमृत घोले, संजीवन सजल सुफल हो।
श्रावण का पावन वातायन सबको सदा सुगम हो ।।
मन को मोहित करता है, दिल का दुख दूर करे वह।
सुख के सदन सरीखा सपना, शान्ति का संगम हो।।
दुख दूर करे दुर्दिन का, सरगम का ताल संजोय।
बहना के कोमल कर से, रक्षाबंधन अर्पित होय ।।
हो निशा दिबा या बदली, जल-जल हो या कीचड़ भी।
दिल का दरवाजा खुला आज, बांधा क्या दलदल दूरी की।।
मिष्ठानों की अरमानों की जीवन के सभी किकानों की।
सुरभित जीवन जो सावन के, सुख चैन सजी बरसातों की ।।
चल ! चल !! बहना आयी घर पर, दिल का दरवाजा खुल चुका द्वादश
ऋतुओं का कौन भला, पावस में सावन खिल चुका।।
बिन रात याद दिलाता था वो चपल चरण मेरे भैया का।
यह सावन है मन भावन है देखो यह सदा सुहावन है।।
घर में दीपक की शोभा है, आँगन में चन्दा की ज्योति ।
भैया की बहियाँ रक्षाबंधन, बहना के कर कंगन मोती ।।
आलम है सुख संवादों का, गीतों का माला फूलों का।
वैसे मर्यादा बहनों की, निखरे गुण-गरिमा भैया की ।।
हम याद करेंगे फिर तुमको, जब भाभी के संग आना तु।
मै पॉव पड्रॅगी बार-बार तेरा अभिनन्दन धूम-धूम कर ।।
तेरे कर मैं रक्षाबंधन भाभी के कर सुन्दर कंगन।
बार-बार मिल तेरे मस्तक, तुम्हें लगाउँ रोली चन्दन ।।