सुलभ संदेश

क्या देश, क्या विदेश

डा० जी० भक्त

क्या देश, क्या विदेश
क्या देश, क्या विदेश

आज के बच्चों युवा सुन लो, कहानी हिन्द की तू।
जिसकी गरिमा खो चूकी सदियों गुलामी की लपट छू।।
अब हिन्द की धरती आजादी है, खुशी से गीत गाती।
हिन्द का झंडा तिरंगा, लहर-फहर उदधि उफनाती ।।
खेतों की हरियाली शहर नगर, की शोभा सड़क की हो।
प्रेम का संबल न सोचे, विश्व में संघर्ष जो हो।।
बनावटी विकास के उल्लास पर न झूम पाये।
संघर्ष और दुख दर्द के धोखे मे मत तू भूल जाये।।
ज्ञान से गरिमा सिमटकर जन साधारण चोट खाये।
गम के गोते झेल अत्याचार को जो गले लगाये ।।
झूठ की झंझा में झूड़मुठ क्यों न नित दिन चोट खाये।
स्पुश्यिों के झोके कही तुझे न झकझोड़ पाये।
दुर्दिन की आंचे कभी धोखे में तुझे जलान पाये।
वर्षों शदी से शान्ति की आशा लगी है।
जमाने को बहाना हर रोज नया चाहिए।।
दुर्जन और सज्जन की भी पहचान होनी चाहिए।
जानकर जंजाल जीवन में कभी न ला सको तो ।।
सुख-दुख की घड़ी को नकार यदि नकार पाओ।
परमाणु की चोट वर्दास्त कही कर पाओं।।
रोग, शोक, भोग के संयोग में न पड़े दुनियाँ।
जंग और नफरत के कशरत होते ही रहेंगे।।
दंगा फसाद का उन्माद जब से चल रहा है।
जनतंत्र और स्वतंत्र की पुरानी कथा आज भी है।।
गाँधी और बुद्ध क्या न युद्ध से परिचित हुए।
देखना है तो भारत को भूलकर भी मन सताओं।।
देव और दानव के बीच जंग क्या कभी रुक सका ?
रीति अनीति में ख्याति जब खो चुकी।
तो भी हिन्दुस्तान पाकिस्तान कहाँ शान्त है।।
भाईयों भला है इससे देश भक्ति को न भूलो।
मानवता की जंजीर को कभी भूलकर भी मत तोड़ों ।।
तिरंगा का अर्थ तीन ओर से बुलंद देश।
एक द्वार युवा वर्ग स्वराज्य का संदेश दे।।

जय हिन्द !

क्या ?…..मिली झलक राष्ट्रीयता की ?

हा !, अवश्य !…..तो सुशिक्षा और सच्चरितता का उपहार है भारत माता !!