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Kshitij Upadhyay KISHOR | MY XITIZ POETRY | Page 21 of 33

Author: Kshitij Upadhyay KISHOR

नन्ही थी मैं तब पापा की परी थी , नन्ही थी मैं तब पापा की परी थी .. ज़रा बड़ी क्या हुई ..

नन्ही थी मैं तब पापा की परी थी नन्ही थी मैं तब पापा की परी थी .. ज़रा बड़ी क्या हुई …. रिश्ता पक्का किया जा रहा था , रिश्ता…

अहम हैं जिंदगियां , कई जिंदगियां तमाम हो रहे हैं, 2020 बदनाम हो रहे हैं।

अहम हैं जिंदगियां कई जिंदगियां तमाम हो रहे हैं, 2020 बदनाम हो रहे हैं। जो पाठ पढ़ा रहे ज़िन्दगी के हमें, वो खुद जिंदगी से परेशान हो रहे हैं! भ्रमित…

मां , चला आया हूं दूर तुमसे, तेरी बातें कितनी सताती है। मां, तेरी बहुत याद आती है।

चला आया हूं दूर तुमसे, तेरी बातें कितनी सताती है। मां, तेरी बहुत याद आती है। चला आया हूं दूर तुमसे, तेरी बातें कितनी सताती है। मां, तेरी बहुत याद…

पगली ! हँसी नही थी फ़िल्मो मे देखा था .., मैने फ़िल्मो में देखा था , वो जो एक नज़र में दिल मे उतर जाए |

पगली ! हँसी नही थी फ़िल्मो मे देखा था …..! मैने फ़िल्मो में देखा था , वो जो एक नज़र में दिल मे उतर जाए | पता नही कब अचानक…

क्यूँ ? , जब रुह एक है तो जिस्मों के बीच ये दूरी क्यूँ सच्चा प्यार अक्सर अधूरा होता है

क्यूँ ? जब रुह एक है तो जिस्मों के बीच ये दूरी क्यूँ सच्चा प्यार अक्सर अधूरा होता है ये सोचना

वक्त लगेगा.. , सुनो ! ज़रा देर से आना , वक्त लगेगा की जख्म अभी नासूर हैं |

वक्त लगेगा..! सुनो ! ज़रा देर से आना , वक्त लगेगा की जख्म अभी नासूर हैं , भरने में वक्त लगेगा | तुमसे जो सीखा हैं , उसे आज़माने में…