चिड़ियारानी
चिड़ियारानी डॉ० जी० भक्त ओ आकाश के राही , डाली पर बसने वाली । निर्भय होकर उड़ने वाली तुम हो चिड़ियारानी । । पंख तुम्हारे रंग – विरंगे , चोंच…
चिड़ियारानी डॉ० जी० भक्त ओ आकाश के राही , डाली पर बसने वाली । निर्भय होकर उड़ने वाली तुम हो चिड़ियारानी । । पंख तुम्हारे रंग – विरंगे , चोंच…
वसन्तोत्सव डॉ० जी० भक्त सरसो के फूलों से सजकर , अमुआँ के मंजर से मिलकर , चली हवा लेकर मकरंद । शिशिर महीना माघ , वसंत । । नदियो की…
जागरण गीत डॉ० जी० भक्त जागरण के गीत हम गायें गमों से दूर हटकर । देश का उत्थान चाहें , कर परिश्रम खूब डटकर । । हम कृषक मजदूर अर्जक…
जिंदगी में कुछ करते जाओं क्षितिज उपाध्याय “किशोर” मकसद खास होना चाहिए, जिंदगी जीने का, यारों। भरोसा मत करना, खुद से ज्यादा किसी पर, यारों। क्योंकि अंधेरें में परछाई भी…
रंग बदलती दुनिया क्षितिज उपाध्याय “किशोर” इस रंग बदलती दुनिया, इंसान की नियत ठीक नही। क़भी वों देवता या फिर, कभी शैतान होता हैं। रंग बदलता गिरगिट-सा, अजब का वह…
जीवन में कर्म क्षितिज उपाध्याय “किशोर” हर दिन कर्म करते है, लोग जिसको याद करते है, सब लोग सब कुछ कॉपी करते है, लोग कर्म नहीं करते भी है, लोग…