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MY XITIZ POETRY | Page 15 of 48 | Poets Community

नारी, कभी तू अशिक्षिता निरस्मिता अबला थी, पराजिता परिमिता कभी असूर्यमपथ्या थी।

नारी कभी तू अशिक्षिता निरस्मिता अबला थी ।पराजिता परिमिता कभी असूर्यमपथ्या थी ।। आज तेरी आभा चतुर्दिक विखर रही ।उत्साह की अविरल प्रयासे उभर रही ।। विकास के बादल की…

पुत्रिया ,पुत्रियाँ उपवन की कलियाँ हैं, सृष्टि की शास्वत संचालिका हैं

पुत्रिया पुत्रियाँ उपवन की कलियाँ हैं । सृष्टि की शास्वत संचालिका हैं । संस्कृति की पालिका हैं । मातृत्त्व की साधिका हैं । जगत की मातृका हैं । प्रकृति की…