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आजाद, स्वतंत्रता, आत्म निर्भरता के प्रति हमारी तत्परता | MY XITIZ POETRY

आजाद, स्वतंत्रता, आत्म निर्भरता के प्रति हमारी तत्परता

डा० जी० भक्त

आज हम मना रहे स्वतंत्रता दिवस।
किन्तु मन है कई प्रकार से विवश ।।
परिवार में बिमारी है।
घर में लाचारी है।।
बाढ़ और सुखार से हो रहा परेशान।
आतंक अत्याचार महंगाई से हैरान।।
जीवन का श्रेय केवल नौकरी को मिला।
कल तक व्यस्त था दूर लाल किला ।।
बहुत कुछ सोच कर आगे बढ़ा लेने विरंगा।
कीमत सुनते ही दिल में उठा दंगा ।।
याद आये बापू
जिन्होने दिलाई आजादी।
जल्दी से मैने जयकार मनादी ।।
स्वतंत्रता दिवस नहीं यह एक भावना है।
संकल्प पूर्वक जीना,
न कुछ लेना न छीनना है।
आज दुनिया युद्ध में व्यस्त,
चन्द लोग ही देश भक्त है।।
भाषा धर्म और विचार में एकता हो।
कभी न समाज में,
विवसता न विसमता हो।।
आज हम पुरानी बातों को भूलकर,
सामाजिक सरोकार पर सहमति तैयार हो।।
यही होगी हमारी श्रद्धाजंलि,
आज के ऐतिहासिक दिन पर।
जो युद्ध मॅडरा रहा है विश्व में,
समाप्त हो शीघ्रतर ।।

!! जय हिन्द !!