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चन्द्रारोहण, परमार्थ परमात्मा का | MY XITIZ POETRY

चन्द्रारोहण, परमार्थ परमात्मा का

डा० जी० भक्त

जनमंगल मुद मंगलकारी, तूही हो वनवारी ।
तेरी धरती अन्नपूर्ण है शस्य श्यामला सारी ।।
नील गगन सागर नीला है सूरज चाँद सरोवर ।
वन उपवन और खेत सुहाते हमको सदा मनोहर ।।
नदियाँ गाती तेरी गाथा निर्भर झर जल भरता ।
रिमझिम बादल बरस बरस कर प्यास धरा का हरता । ।
फल-फूलों से भरी ये धरती कितनी सुन्दर लगती I
जीव-जगत पर्वत जंगल से भूख सदा है मिटती ।।
कितनी दया तुम्हारी मुझ पर देती हमको सबकुछ ।
पवन व्योम में इन्द्रधनुष तारे नक्षत्र बहुत कुछ ।।
आज तेरा विज्ञान चाँद और ग्रह की शैर कराते ।
ये संसाधन तेरे ही हैं जन मन को बहलाते ।।
विविध रुप स्वरुप तुम्हारे नम में हमें सुहाते हैं ।
तेरी महिमा माया बनकर विविध रंग दर्शाते हैं ।।
सारे सागर और धरातल तेरी महिमा करती नाज।
देख चाँद पर पाँव पधारे चन्द्रयान पर हम हैं आज ।।
धन्यवाद हम देने उनको जिनमें गढ़ पाया इतिहास ।
अन्तरिक्ष में पॉव जमाकर भारत का यह सफल प्रयास ।।

23 अगस्त 2023
चंद्रयान - 3 के सफल लैंडिंग के लिए इसरो के सभी वैज्ञानिकों और प्रोजेक्ट से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक बधाई ।
इस गौरवशाली पल की सभी देशवासियों को शुभकामनाएं ।
क्षितिज उपाध्याय किशोर

23 अगस्त 2023

चंद्रयान – 3 के सफल लैंडिंग के लिए इसरो के सभी वैज्ञानिकों और प्रोजेक्ट से जुड़ी पूरी टीम को हार्दिक बधाई ।

इस गौरवशाली पल की सभी देशवासियों को शुभकामनाएं ।

क्षितिज उपाध्याय किशोर