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सत्यमेव जयते | MY XITIZ POETRY

सत्यमेव जयते

डा० जी० भक्त

सदा सत्य की ही विजय होती है।
गुलामी का गम और गौरव का दम
इस हेतु भारत रहा विनम्र
सच कहते है
कि
कुछ बात है कि हस्तो मिटती नहीं हमारी !!!
इसमें ही महानता है कि सुख पाकर संतुष्ट
रहें और दुख में धैर्य धारण किया करें,
तो एक दिन सुख लौटेगा अवश्य ।
यह सत्य है कि भारत अपने आदर्शो के कारण
दुनियां में महान माना जाता रहा, आज
भी है। कभी इतनी ही है कि
भारत को पूर्ण स्वावलम्बी
होना चाहिए था।
शदियों की गुलामी को इसने नम्रता से जीता
कुर्वाणी को हँसते-हँसते झेला,
तो आज भी इसकी दीनता का ही साम्राज्य है।
किन्तु

आज भी जिसमें भारतीयता है, वे ही इसकी प्रतिष्ठा थामे हुए हैं।
मिहनत कश किसान और मजदूरों का है।
परन्तु इसपर कब्जा उद्योग पतियों का है।
विकास का पुरष्कार पूँजीपति के हाथो और
दान रूप राहत गरीबों को बेरोजगारी ग्रामीण झेलें ।
अर्थवत्ता गयी उपभोक्ता बाद की झोली में ।
सरकार को मात्र सत्ता भर का सुख,
बदनामी चढ़ी सिर पर और गणतंत्र
बना कमजोर लोग कहते सरकार चोर है तो देशभक्तों
सोचना है।
अब न्याय करना है मनदाता को ।
सत्ता खरीदो नहीं जाती, सत्यता सेवा और
न्याग का मूल्य जनमता है। अन्यथा गनीनत है ।