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तुम मेरे लिए क्या हो | MY XITIZ POETRY

तुम मेरे लिए क्या हो ?

पल्लवी कुमारी (पूर्णिया, बिहार)

तपते मरुस्थल में बूंद-ए प्यास हो,
थकते कदमों को दी जाने वाली आस हो।
अंधेरे में दिखाती रोशनी को पिया हो,
क्या बताऊं तुम्हें और क्या किये हो।
थमते सांसो की ऑक्सीजन हो,
जिंदगी को जिंदगी देने वाली दवा हो।
डूबती नैया की पतवार हो,
ख़तम ना होने वाली इंतजार हो।
जो कह ना सके वह इकरार हो,
मतलब की दुनियाँ में सच्चा प्यार हो।
मित्र की अहमियत समझने वाली मित्रता हो,
मेरा गम जहां खत्म हो वो पता हो।
मेरे हर शब्द का अलंकार हो,
मेरा घमंड मेरा गुरूर मेरा अहंकार हो।
किसी शायर की लिखी गजल हो,
माली के दामन में खिलता कमल हो।
कभी पुराना होने वाली पहल हो,
तुम ही शराब और ताजमहल हो।
हजारों दर्द दफन किए धड़कन हो,
तुम ही मिलन तुम ही तर्पण हो।
आंखों में मोहब्बत का सागर लिए प्यार हो,
मैं सागर के इस पार तुम उस पार हो।
गम भरी जिंदगी की एक मुस्कुराहट हो,
दिल के दरवाजे पर दस्तक देती आहट हो।
पल पल जिसे देखने का दिल करे वो दर्पण हो,
मेरी संबल मेरी हिम्मत मेरा समर्पण हो।
बेरंग जीवन को बनाने वाली इंद्रधनुषी रंग हो,
तुम ही मेरी अब आखिरी उमंग हो।
जिसका जवाब नहीं वो सवाल हो,
सच्ची दोस्ती की देती मिसाल हो।
मैखाने में छलकता हुआ शराब हो,
जैसा भी हो आप लाजवाब हो।

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