The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.
2026 चिन्तन साल 2026 पर | MY XITIZ POETRY

2026 चिन्तन साल 2026 पर

डा० जी० भक्त

गया दिसम्बर आयी, जनवरी।
कितनी शीत इस पर पड़ रही।।
दोनों मास के दिन एकतीस ।
तब तो आया साल छब्बीस ।।
कभी न देखा इतना जाड़ा।
सब्जी का बाजार गरमाया ।।
आलू प्याज टमाटर क्या हैं।
बथुआ साग तो नाम कमाया ।।
अर्थ व्यवस्था पर है जोर।
सर्वत्र विकास पर लगी है होड़।।
फल से महँगे बिकते कंद।
जम्मू कश्मीर से बिार में ज्यादा ठंढ़ ।।
अरे नहीं जानते इसका मंत्र।
टैरिफ जो लगाये भारत पर ट्रंप ।।
गजब सोच है उनका भाई।
यह तो जाड़ा की ऋतु है आई ।।
जब भारत में जाड़ा आता।
चिउड़ा दही लोग है खाता।।
गर्मी जन को नहीं सताता।
कैसे कहूँ मन है घबड़ाता ।।
बासमती पर कस गयी कीमत ।
संक्राति में चूड़ा गनीमत ।।
नहीं भाई घवडाओं मत।
मोदी जी और ट्रंप में चल रहा गप-सप।।
जाने या न जाने दुनिया वाले जाने।
शान्ति को क्रान्ति से उच्च स्थान माने ।।
हम भारतवासी सदा शान्ति पुजारी।
आदि से अबतक हमारा इतिहास है साक्षी ।।