श्रद्धांजलि सुमन पूज्य बापू की
डा० जी० भक्ता
जनवरी उन्नीस सौ अड़तालिस।
जीवन दातृ वही, नही अप्रत्यासित ।।
उनका जीवन जो सव दिन से रहा समर्पित ।
दुनियाँ को उनकी ऊर्जा है अर्पित ।।
वह ऊजा जो सत्य अहिंसा देश भक्ति का।
जिनकी शिक्षा देते थे वे नित दिन ।।
उनकी अमर देन आजादी हमने पाली।
उसका महत्त्व किसने जीवन में नही चुकाई ।।
लेकर राम का नाम “हे राम” उच्चारण ।
रखकर गीता हाथ किया अध्यात्म संवरण ।।
देह दिल्ली के राज घाट जमुना को अर्पित ।
आज लिए हम श्रद्धा पुष्प लाखों में समर्पित ।।
इसको कहते जीवन सार्थक नही निरर्थक ।
मृत्यु है देहावसान, आत्मा का समर्थन ।।
नही कमी कोई रही जो बापू हम सिखा गये।
अपने पथ पर चलने का संकल्प दिला गये ।।
गाना रोना याद में लाना जानो मरने-सा है।
करके हरदम याद पथ पर मरकर जीना है।।
भारत ही नही, दुनियाँ वालों को न भूलना।
“पूज्य बापू अमर रहें!!”