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प्रेम पिपासा, की प्रत्याशा ऑपरेशन सिन्दूर | MY XITIZ POETRY

प्रेम पिपासा, की प्रत्याशा ऑपरेशन सिन्दूर

प्रेम उगता भाव बनकर जब दिलों में स्नेह सिंचित।
चेहरे पर चमक मन में हास और उल्लास विकसित ।।
नेत्र ज्योति चाहती पलकों में किंचित थाम लूँ मैं।
कपित कुसुम की डाल को कर-कवच में अपना लू मैं।।
ये भाव है गनुहार जीवन पल्लवित कुसुमित जो पाते।
कामना के चन्द दुमित किश्लय जमी पर नमित होते।।
याद की फरियाद कतिपय जब सधन धन की घटा में।
कभी चिन्तन से चमन मे पात क्वचित निपात पाये।।
जब भावना की कामना के लक्ष्य का तद्गम न दिखता।
कर्म के उपवन कदाचित स्नेह मुदित उपचार निखरता ।।
प्ररोह का अवरोह सिंचन वाहता पोषण निगुरत।
अनल का परिताप सह पाती कदाचित कुंद पल्लवता।।
जीव जीवन और जीना कर्म सूचक बनी है संज्ञा।
हो कैसे निर्वाह जगत में बोध देती है नित प्रज्ञा।।
भोजन वसन आवास पालन स्वस्थ चिन्तन और सेवा।
मृदु वचन सम्मान जन सरोकार पूरण जनाकांक्षा ।।
एतानि सर्वाणि जीवन जतन सुलभ सर्वत्र सब घर।
नही कष्ट उत्पीड़न शोषण संरक्षण और न्याय विभूषण।।
सर्वे भवन्तु सुखिनः है उद्देश्य फल का लक्ष्य बढ़ना।
शान्ति और संतोष निर्णय स्वस्थ जीवन नहीं झगड़ना।।
भूख प्यास विलास संयुक्त सुख व्यसन संचय की चेष्टा।
हम, हमारा और थोड़ा, सर्व सब मेरा में अकेला ।।
सुख भोग वासना और तृष्णा ऐषण परवंर्जना।
प्रेम के विपरीत ये सब घृणा द्वेष संघर्ष वेदना ।।
प्रेम पियासु, जब जिज्ञासु फिर क्यों छलके आँख से आँसू ।


शान्ति के प्रस्तावक सब नर, कौन कहाये पोषक इसके।
आतंकवाद को कौन मिटाये सेटलाइट के सागर जग के।।
प्रेम पिपासु सभी जगत के लेकिन इससे जुड़े परस्पर।
हेतु अहैतुक नाता जितना, इससे किसको चलना बचकर ।।
ईश्वर पूजन मैतृ भक्ति चाहे जो संबंध जगत के।
मानो इन्हें व्यर्थ के बंधन, लेन-देन के सोच है सबके।।
सभी देश है मित्र विश्व में आज जुड़े है नाते जिनके।
ये नाते व्यवसाय स्वार्थ के राजनीति से जुड़े सबब हैं।।
नहीं कोई पद प्रेम के गौरव नही मान सम्मान के वैभव।
सभी स्वार्थ से जुड़े परस्पर वैश्विक और उदार बनते जब ।।
आतंकवाद प्रतिरोध समर्थक कौन दिखते है सापेक्ष।
सबके पास अग्न्यास्त शस्त्र फिर कौन कहायेगा निरपेक्ष ।।
अगर मित्र विश्व का जन मन तब ये अस्त्र धूल या अर्थ।
कौन बतायेगा हम सबको इनमें से है बापू कौन।।
जिनके पुरखे राज चलायें वे भी जग में गोली खाये।
जो मध्यस्त बने शान्ति के ताशकन्द या शिमला पैक्ट ।।
मूल्य प्रेम का सदा मौत क्या मुक्ति-मौत के मूल्य एक है?
देश प्रेमी जो लाल बहादुर इंदिरा राजीव बापू भी है ?
सबने देखा, सबने जाना, लेकिन किसने दिल से पूछा ?
लेकिन प्रेम मौत से मिलता जिसका मूल्य लाखों तक जाता।
सुनों भाईयों, स्वर्ग गामियों देश भक्ति को नहीं भुलाना।।
देश प्रेम कोई प्यास नही, वही सही अनमोल चिन्ह है।
चाहे तोपों का नमस्कार या पूज्य बापू का स्वर हे राम !!


अवश्य सोचना होगा जग को क्या हम गोली खायें।
और विश्व की कुल सम्पति जलकर राख बन जाये ।।
जल मिट जाने, भूखे मरने और अश्रु स्त्राव भरका हो जीवन।
अबतक तो होता रहा, अभी हो रहा, और होना है इस क्षण।।
शस्त्रास्त्र त्याग का प्रण करना, मानव मानव से रखना प्रेम।
जन-जन में विश्वास जगे, सहकार न्याय और हो अर्पण।।
कभी न करना युद्ध, बनो तुम बुद्ध, जैन महावीर।
न मारा, नही सताओ, सुरक्षित हो सृष्टि-तकदीर ।।
!! हम बने बुद्ध महावीर !!

भारत पर आपत्ति पाक आक्रमण की संभावना का समन भारत की भूमिका पर विन्रम दृष्टिकोण संदेश।।