खेत खलिहान उठो सबेरे हुआ बिहान । खेती करने चला किसान ।। कृषि प्रधान देश की गरिमा । हरित क्रान्ति की है यह महिमा ।। हरी – भरी है खेत हमारी । भरा – पड़ा भंडार बखारी ।। प्रगत देश की यह पहचान । हमें दिलाता खलिहान ।। Post navigationहोली आयी , होली है त्योहार रंग का , हँसी – खुशी , उत्साह उमंग का | फल , फल गुणों का है भंडार , फल से भरा – पड़ा संसार ।