जिंदगी

1.
जब दादी की कहानियां ही लोरी थी
और दादी का गोद ही सिरहाना था
सच कहूं तो वो बड़ा ही खूबसूरत जमाना था
स्कूल जाने की ख़्वाहिश तो थी
 पर जाने का दिल ना करने पर यह कहना
कि मां पेट में बहुत दर्द है
सच कहूं तो ये बड़ा ही खूबसूरत बहाना था
 तब बड़ी बड़ी गाड़ियों का शौक नहीं था हमें
कंधे से हाथ जोड़ हम खुद ही रेल गाड़ी बन जाते थे
जहां हर बच्चा कागज की कश्ती का दीवाना था
सच कहूं तो वह बड़ा ही खूबसूरत जमाना था …।
2.
शायद कुछ जहर सी हो रही है जिंदगी
सवाल दर दर पर है जो भटकते भटकते दूर तलक
बेजान शहर सी हो रही है जींदगी ,
कफिया भी कुछ पकड़ नहीं आता जो लिखते लिखते कोई गजल
अनजान बहर सी हो रही है जींदगी ,
आफताब हर रोज परवान चढ़ता तो है
 पर रोशनी मुझ तक नहीं आती जो चलते – चलते अंधेरों पर
तलाश सहर से हो रही है जिंदगी ,
माना टूटना लाजमी था सफर में
पर जो हिस्सा टूटते टूटते बिखर गया वही
बेनाम कबर सी हो रही है जिंदगी …..।
Ispriya Singh Akanksha
Jnv Saran Bihar (2011-18)
City:- Patna
Hobby:- poetry painting Volleyball
Instagram:-Ispriya Singh Akanksha
5. Messages
Let your smile change the world but don’t let the world to change your smile.
2 thoughts on “जिंदगी; , जहां हर बच्चा कागज की कश्ती का दीवाना था सच कहूं तो वह बड़ा ही खूबसूरत जमाना था …।”

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