एक दिन हम जुदा हो जायेगें

एक दिन हम जुदा हो जायेगें,

न जाने कहाँ खो जायेगें,
तुम लाख पुकारोगे हम को,
पर लौट के हम न आयेगें,
थक-हार के दिन के कामों से,
जब रात को सोने जायेगें,
देखोगी जब तुम फोन को,
पैगाम मेरा न पाओगें,
तब याद तुम्हें हम आयेगें,
पर लौट के हम न आयेगें,
उस रोज ये रिश्ता छूटेगा,
दिल इतना ज्यादा टुटेगा,
फिर कोई न हमसे रूठेगा,
हम न आँखे खोलेगें,
तुम से कभी न बोलेगें,
आखिर उस दिन तुम रो दोगी,
ये दोस्त, तुम मुझे खो दोगी।

क्षितिज उपाध्याय”किशोर”

 

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