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बच्ची के जन्म | MY XITIZ POETRY

बच्ची के जन्म 

क्षितिज उपाध्याय “किशोर”

आज अखबार में ,
यह खबर आई।
लोगों ने अपनी,
अंगुली चबाई।

हंसाती हुई जन्मी,
एक बच्ची।
देखने में है,
बहुत ही अच्छी।

लोगों ने समझा,
उसे लक्ष्मी।
दुनिया की बच्ची,
थी भले ही,
वह उम्र में कच्ची।

बच्ची के जन्म के बाद ,
बाप की हालत अजीब थी।
बंद थी बोली,
सुख रही जीभ था।

आखिर किसकी खातिर,
चन्द रुपयों की खातिर।
यह तो एक जूल्म हुआ,
बाप के दिल का खून हुआ।

क्योंकि दहेज की दुनिया है।
इन मर्दों की दुनिया में ,
मानते है बस एक खिलौना।
जिसने जब-चाहा खेला,
जब चाहा तोड़ा,
जब चाहा आग में धकेला।

कौन? करेगा उनकी रक्षा,
कौन? दिलाएगा! उन्हें इन्साफ
ये वकील तो रिश्वत खाते है,
वह जल्द ही मुक्ति करा देते है।