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नवोदय से नवोदय, प्रवेश के बाद | MY XITIZ POETRY

            नवोदय से नवोदय, प्रवेश के बाद

क्षितिज उपाध्याय “किशोर”

मुझे नवोदय सारण ने भेजा,
और नवोदय में कहां दम था।
मुझे जहां भेजा गया वहां पानी ही कम था।
मुझे एरोप्लेन से नहीं ले जाया गया,
क्योंकि टिकट कम था।
मुझे ट्रेन से ले जाया गया,
क्योंकि भाड़ा कम था।
मुझे अकेला नहीं छोड़ा गया,
क्योंकि मेरा उम्र कम था।
मुझे नवोदय में लाकर छोड़ा गया,
क्योंकि भुला जाने का डर था।
मुझे शिक्षक ने बुलाया,
क्योंकि शिक्षिकाओं में कहाँ दम था।
मुझे से शिक्षक ने पूछा तुम कौन ,
बोला,मुझे नवोदय सारण ने भेजा,
और नवोदय में कहां दम था।
मुझे जहां भेजा गया वहां पानी ही कम था।
मुझे उस क्लास में बैठाया गया,
जिसका Strength कम था।
मुझे शिक्षक ने पढ़ाया नहीं ,
क्योंकि Class  में समय कम था।
शिक्षक ने Homework दिया,
वह भी अधिक था।
मैं Homework नहीं किया,
क्योंकि मेरे पास समय कम था।
मुझे बातो से डराया गया,
क्योंकि डंडो में कहाँ दम था।
मुझे वह नीलगिरी सदन दिया गया,
क्योंकि नीलगिरी के छात्रों में कहाँ दम था।
मुझे ऐसा भोजन दिया जा रहा था,
जिससे रातो-दिन तंग था।
मुझे नवोदय सारण ने भेजा,
और नवोदय में कहां दम था।
मुझे जहां भेजा गया वहां पानी ही कम था।

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