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दोस्त | MY XITIZ POETRY

दोस्त

क्षितिज उपाध्याय “किशोर”

आदमी से आदमी,
दोस्त से दोस्त,
संबधी से संबधी,
जुदा होता है।

दोस्त से पहले,
संबधी से पहले,
आँखों से पहले,
दिल।

अलग-होता है,
जैसे-पौधे से,
फूल से,
अलग होता है,
पंखुरी।

बन जाता है, सुराग
चली जाती है, खुशी
बन जाता है, दशर्न का हिस्सा
बनी रह जाती है, यादें
सदियों पुरानी।

बिखर जाता है,
जैसे किसी पौधे से,
फूल की डाली,
हो जाता है,
फूल देना कठिन।
जाते है, मुरझा डाली में।

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