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आज का हिंदी दिवस | MY XITIZ POETRY

आज का हिंदी दिवस

क्षितिज उपाध्याय “किशोर”

कसम हिंदी की खाने को,
बर्षो भर न निभाने को,
पर क्या करने को?
इंडिया हमारी कंन्ट्री है
हिंदी बोलना हमारी ड्यूटी हैं
बेचारी हिंदी कि भी किस्मत फूटी है
आज-कल की यंग जेनरेशन,
जब भी मुँह खोलती हैं
ऑनली इंग्लिश बोलती है
पर ऐसा सिचुएशन है
दूसरे को हिंदी बोलना सिखाते-सिखाते
खुद हिंदी बोलना भूल जाने को,
औरों से इंग्लिश सुन-सुन कर,
खुद इंग्लिश सीख जाने को,
ऑनली एक दिन हिंदी बोलने को,
पूरे वर्ष इंग्लिश में बाते करने को,
ये भी बिल्कुल राईट है।
डेली लाईफ में हिंदी,
लैंग्वेज को लाने को।
तब भी इस को पूरे,
वल्ड में इस फैलाने को,
कसम हिंदी की खाने को,
बर्षो भर न निभाने को,

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