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हिंदी कविता | MY XITIZ POETRY

Category: हिंदी कविता

हिंदी कविता

स्वतंत्र भारत, तुझे नमन ! तेरा खिला रहे चमन !! हम एक अरब चालीस करोड़ जन ।

स्वतंत्र भारत डा. जी. भक्त तुझे नमन ! तेरा खिला रहे चमन !! हम एक अरब चालीस करोड़ जन ।जो रच रहे अपना सुखमय जीवन ।। खेत खलिहान वन बाग…

रक्षाबन्धन, आया राखी का त्योहार, खूब सजा है शहर बाजार ।

रक्षाबन्धन डा. जी. भक्त (वैशाली, बिहार) आया राखी का त्योहार ।खूब सजा है शहर बाजार ।।निखर रहा बहनों का प्यार ।घर- घर में फैला मनुहार ।।इसे बनाओं मत व्यापार ।पर्व…

सावन आयो रे , बहुत बदलाव लायों रे, सरिव सावन रें

सावन आयो रे डा. जी. भक्त सावन आयो रे , बहुत बदलाव लायों रे ।सरिव सावन………………………………..रें ।।सब दिन सावन था मन भावन , आज नसावन रें ।तेज हवा दिन रात…

प्रार्थना, ब्रह्म सृष्टि और देव अनेको, गुरु पितु-मातु फिर मित्र घनेरो।

प्रार्थना श्रुति (वैशाली, बिहार) ब्रह्म सृष्टि और देव अनेको । गुरु पितु-मातु फिर मित्र घनेरो ।। भूमि धेनु सरिता फिर पर्वत । तरु फल फूल बादलनभ वर्षत ।। जिनका कृपा…

नारी, कभी तू अशिक्षिता निरस्मिता अबला थी, पराजिता परिमिता कभी असूर्यमपथ्या थी।

नारी कभी तू अशिक्षिता निरस्मिता अबला थी ।पराजिता परिमिता कभी असूर्यमपथ्या थी ।। आज तेरी आभा चतुर्दिक विखर रही ।उत्साह की अविरल प्रयासे उभर रही ।। विकास के बादल की…

पुत्रिया ,पुत्रियाँ उपवन की कलियाँ हैं, सृष्टि की शास्वत संचालिका हैं

पुत्रिया पुत्रियाँ उपवन की कलियाँ हैं । सृष्टि की शास्वत संचालिका हैं । संस्कृति की पालिका हैं । मातृत्त्व की साधिका हैं । जगत की मातृका हैं । प्रकृति की…