बरसात - 2 Rain - 2 hindi poems poetry kavita balkvita Dr. G. Bhakta Xitiz

 बरसात

 देखो आयी है बरसात ,
 बूंदे पड़ती हैं दिन – रात ।
 छायी हुई घटायें काली ,
 दिन में फैल गयी अंघियाली ।।
 पानी पड़ता जोर – शोर से ,
 शुरु हुआ है आज भोर से ।
 रिमझिम – रिमझिम पड़े फुहार
 गुड्डी को है लगी बुखार ।।
 सब बच्चे है खुशी मनाते ,
 छाता ले विद्यालय जाते ।
 देखो गैया बोल रही है ,
 अपना भोजन खोज रही है ।।
 हवा चल रही धीरे – धीरे ,
 नहीं काटते मच्छर कीड़े ।
 पानी से भर गया तालाब ,
 चलने लगी नदी में नाव ।।
 खेतों में फैली हरियाली ,
 लोगों में आयी खुशियाली ।
 मेढ़क की टर्र – टर्र आवाज ,
 देखो मल्लाहों का राज ।।
 सूरज निकला अभी शाम में ,
 इन्द्रधनुष है आसमान में ।
 भींगा कुत्ता टहल रहा है ,
 बेंग मजे में उछल रहा है ।।
 सब बच्चे है ताली देते ,
 नही किसी को गाली देते ।
 प्यार भरा उनका है जीवन ,
 सुखमय लगता है घर आंगन ।।
 कितनी काली लगती रात ,
 जबसे आयी है बरसात ।।
One thought on “बरसात, देखो आयी है बरसात , बूंदे पड़ती हैं दिन – रात ।”

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